किसी शायर ने क्या खूब कहा है कि ... तारीख कभी खून को पानी नहीं लिखता . लेकिन लग रहा है यू पी ए सरकार इस कहावत को नहीं मानती. तभी तो गोवा मुक्ति संग्राम पर प्रणब दा ने लोकसभा में जो बयान दिया वो हकीक़त से कोशो दूर है. गोवा मुक्ति संग्राम की बात हो और समाजवादियों के संघर्ष को भुला दिया जाए. तो ये सच छिपाने के लिए आँख मुंदने जैसा है . डॉ राम मनोहर लोहिया , मधुलिमये , जमुनालाल शाश्त्री और सरयू राय के साथ ही देशभर के कई समाजवादी साथियों ने गोवा मुक्ति के लिए संघर्ष किया. उन्हें याद किया जाना चाहिए . इसे मुलायम सिंह , शरद यादव और लालू यादव ने भी दुहराया. लेकिन यू पी ए सरकार आँख मूंदकर बैठी है. इतिहास में छेड़ छाड़ की सजा उन्हें ज़रूर मिलेगी . जो मुल्क अपने महा पुरूषों को याद नहीं करता और जो अपने धरोहर को भूल जाते है . उनकी विरासत भी बहुत आगे नहीं जाती . हम ये भी नहीं कहते की गोवा मुक्ति संघर्ष की लड़ाई केवल समाजवादियो ने लड़ी थी . इस लड़ाई अलग अलग विचारधाराओ को मानने वाले कई लोग थे जो देश के अलग अलग हिस्सों को रेप्रेसेंत करते थे . उनके भी बलिदान को कम करके नहीं आँका जा सकता .
ऐसा नहीं है की पहले इस तरह के उदहारण नहीं है . लेकिन इस बार का जख्म ज़रा ताज़ा है. कांग्रेस नीत सरकारों ने बहुत बाद में आज़ादी की पहली लड़ाई की हकीक़त को स्वीकार किया था . और बहुत बाद में सिपाही विद्रोह और पहले स्वाधीनता संग्राम की आड़ में छुपाती रही . सरकार की उदासीनता का आलम ये है की आज भी संपूर्ण भारत के अंतिम बादशाह और पहले स्वाधीनता संग्राम के नेता बहादुर शाह ज़फर अपने मुल्क में समाधी के लिए ज़मीन ढूंड रहे है. इतिहास के साथ जितनी छेड़ छाड़ कांग्रेस ने की है . शायद दुनिया के किसी मुल्क में किसी ने भी की होगी . पर अब समय बदला है . सूचना क्रांति का दौर है और सरकार का झूठ छिपने वाला नहीं है. जैसा की शरद यादव ने कहा, कि डॉ लोहिया जैसो को तारीफ कि ज़रूरत नहीं उनका बलिदान देश जनता है . पर अफ़सोस इतिहास से छेड़ छाड़ कि है जिसे बर्दास्त नहीं किया जायेगा .
-राजेश कुमार ( लेखक टीवी पत्रकार है)

Like me, Ram Manohar Lohiya was a son of our sacred motherland and Sharad Yadav, Lalu Prasad Yadav and Mulayam Singh Yadav haven't any right to defame him. The above mentioned trio always connects themselves with Lohiya ji and Jai Prakash ji. Actually, they want to take the credit of the noble works done by these great personalities. To bring a social reform is the resposibility of every Indian and a few except these ballet greedy politicians understands and maintains this.
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